निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि
        कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
        भारत सरकार

सार्वजनिक सेवा वेबसाइट
निर्माता (निशुल्क)

 
"निवेशक हित सर्वोपरि"


श्री सलमान खुर्शीद
केन्द्रीय मंत्री (स्वतन्त्र प्रभार)
कॉरपोरेट कार्य
मंत्रालय

  आईईपीएफ के बारे में
  अधिनियम
  नियम
  आईईपीएफ समिति
  मुख्य समिति
   संक्षेप
   कार्य
   -  सदस्य
  उप–समिति
   संक्षेप
   -  सदस्य
  आईईपीएफ के साथ पंजीकृत
  गैर– सरकारी/स्वयंसेवी संगठन
  आईईपीएफ द्वारा समर्थित 
  परियोजनाए
  संरक्षक संगठन
  कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
  आईईपीएफ के पदाधिकारी
  आईईपीएफ के बारे में 
  सामान्य प्रश्नोत्तर
रिफण्ड से सम्बन्धित
जानकारी के लिए
 यहां क्लिक करें

 
आईईपीएफ के बारे में
नियम

भारत का राजपत्र
असाधारण
भाग–।। खण्ड 3 (।)
विधि न्याय एवं कम्पनी मामले मंत्रालय
कम्पनी मामले विभाग
अधिसूचना
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर, 2001

जीएसआर 750 (ई) कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 642 की उपधारा 1 के वाक्य अ और ब में दी गई शक्तियों को लागू करते हुए और अधिनियम की धारा 205 सी की उपधारा 3 को साथ रखते हुए, केन्द्र सरकार ने निम्नलिखित नियम बनाये हैं:–

1.आरम्भ :
   1.1. इन नियमों को निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि (जागरूकता एवं निवेशकों की सुररक्षा) नियम, 2001 कहा जायेगा।
   1.2. सरकारी गजट में प्रकाशन के साथ ही ये नियम प्रभावी माने जायेंगे। 
 
2.1 परिभाषा:
 
किन्ही अन्य सन्दर्भ के अभाव में इन नियमों के लिए निम्नलिखित आवश्यक हैं:–
 
     अ. अधिनियम का अर्थ कम्पनी अधिनियम 1956 से है, 
     ब.

निधि से तात्पर्य कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 205 सी की उपधारा 1 के अधीन स्थापित निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि (आईईपीएफ) से है,

     स.  मन्त्रालय या विभाग का आशय कम्पनी मामलों को देखने वाले केन्द्र सरकार के मन्त्रालय या विभाग से है,
     द.

समिति/ उपसमिति का अर्थ अधिनियम की धारा 205सी की उपधारा 4 के अधीन केन्द्र सरकार द्वारा गठित समिति से है, जिसका गठन निधि के प्रबन्धन के लिए किया गया है,

     य. फॉर्म का अर्थ इन नियमों में वर्णित फॉर्मों से है,
     र.

 इन नियमों में प्रयोग किये गये शब्द एवं भाव, जिन्हें यहां परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन अधिनियम में परिभाषित किया गया है, उनके अर्थ अधिनियम में दिये गये उनकी परिभाषाओं से ही होगा।
 

3. निधि में जमा
 
      1.

कम्पनियों द्वारा निधि में जमा की जाने वाली रकम, अधिनियम के अनुसार ऐसी देय रकम के देय होने की 30 दिनों की अवधि के अन्दर पंजाब नेशनल बैंक की सम्बन्धित विशिष्ट शाखाओं में जमा करनी होगी। निधि में इस तरह जमा की गई राशि नियम 4 के अनुसार खाते में रखी जायेगी।
 

     2.  
    अ.

कम्पनियों द्वारा केन्द्र सरकार की ओर से पंजाब नेशनल बैंक की ऐसी शाखाओं में जमा की जाने वाली राशियां चालान (तीन प्रतियां) के साथ जमा की जायेंगी। बैंक कम्पनी से राशि प्राप्त करने के प्रमाण के तौर पर कम्पनी को अपनी मुहर लगी दो प्रतियां वापस करेगा।

    ब.

हर कम्पनी को सम्बद्ध कम्पनी रजिस्ट्रार के पास चालान की एक प्रति (अ. में बताये निधि के खाते में राशि जमा करने के प्रमाण के साथ) जमा करनी होगी।

    स. कम्पनी भुगतान की गई राशि का पूरा ब्यौरा और अपने खाते का नाम चालान में भरेगी।
 
     •

हर कम्पनी को निधि के खाते में राशि जमा करने के बाद, सम्बद्ध कम्पनी रजिस्ट्रार के पास अलग से एक विवरण फॉर्म भेजना होगा, जो भारत में कार्यरत किसी चाट‍र्र्ड एकाउंटेंट या कम्पनी सचिव या कॉस्ट एकाउंटेंट या किसी अन्य वैधानिक अंकेक्षक द्वारा प्रमाणित हो। बशर्ते कि कम्पनी 3 सालों की अवधि के ऐसे व्यक्तियों के सम्बन्ध में फोलियो नं., प्रमाणपत्र सं., आदि से सम्बन्धित विवरण रखती हो, जिन्हें अदत्त या बिना दावे का लाभांश, आवेदन राशि, परिपक्व जमा या ऋणपत्र, अर्जित या देय ब्याज दिया गया हो। समिति या उपसमिति के पास ऐसे लेखों का निरीक्षण करने के अधिकार होंगें।

     •

ऐसा विवरण मिलने पर सम्बद्ध कम्पनी रजिस्ट्रार अपने रजिस्टर में विवरणों की प्रविष्टि करेगा और मासिक आधार पर प्राप्त या जमा भुगतानों के विवरणों का सम्बद्ध भुगतान एवं लेखा अधिकारी के विवरणों से मिलान करेगा।

     •

प्रत्येक कम्पनी रजिस्ट्रार हर महीने प्राप्त होने वाली ऐसी प्राप्तियों का सारांश महीने की आखिरी तिथि से सात दिनों के अन्दर कम्पनी मामले विभाग को सौंपेगा।

     •

 

कम्पनी मामले विभाग ऐसी प्राप्तियों का एक समेकित सारांश तैयार करेगा और कम्पनी मामले विभाग के प्रधान भुगतान एवं लेखा कार्यालय के साथ त्रैमासिक आधार पर इनका मिलान करेगा।
 

4.लेखांकन का तरीका
 
   1.अ.

सभी प्राप्त राशियों को निम्नलिखित लेखा शीर्षकों में रखा जायेगा,जो बाद में निधि के खाते मे हस्तांतरित की जायेगी।
 

मुख्य शीर्षक यानि मेजर हेड 0075 – विविध सामान्य सेवाएं
 
मुख्य शीर्षक यानि मेजर हेड 104 – कम्पनी में निवेशकों के बिना दावे के और अदत्त लाभांश, जमाएं और ऋणपत्र आदि
 

अ.  अदत्त लाभांश 
ब.  प्रतिभूतियों के आबंटन के लिए कम्पनियों द्वारा प्राप्त अदत्त आवेदन राशि और और देय रिफण्ड 
स.  अदत्त परिपक्व जमा 
द.  अदत्त परिपक्व ऋणपत्र 
य.  अ से द में अर्जित ब्याज 
(i)      अदत्त लाभांश पर ब्याज 
(ii)      प्रतिभूतियों के आबंटन के लिए कम्पनियों द्वारा प्राप्त अदत्त आवेदन राशि और और देय रिफण्ड पर ब्याज 
(iii)      अदत्त परिपक्व जमा पर ब्याज 
(iv)      अदत्त परिपक्व ऋणपत्र पर ब्याज 

नोट: अ से द तक के उप–शीर्षक होगे, य (i) से (iv) तक विस्तृत शीर्षक होंगे।
 
ब.1-

 राज्य सरकारों, कम्पनियों या किन्हीं अन्य संस्थानों द्वारा निधि में दिये गये अनुदान और दान मेजर हेड-0075 विविध सामान्य सेवाएं के नीचे लघु शीर्षक या निमाइनर हेड 800– अन्य प्राप्तियां में जमा किये जायेंगे।
 

2-

 निधि के कार्यों के संचालन पर हुए सभी व्यय कार्यशील र्षक यानि कम्पनी मामले विभाग के व्यय शीर्षक में डाले जायेंगे और निधि से इतनी ही राशि हस्तांतरित की जायेगी। 
 

3-

यदि निधि खातों से कोई आधिक्य हो तो वह वर्तमान में निवेश के लिए प्रयोग किया जायेगा।

 

5.समिति पर व्यय
 
अ. समिति या उपसमिति के अधिकारिक सदस्यों को उनके पद के लिए बने नियमों के अनुसार यात्रा भत्ता दिया जायेगा।
 
ब. समिति या उपसमिति के गैर–अधिकारिक सदस्यों या समिति या उपसमिति के कार्य के सिलसिले में विशेष आमंत्रित सदस्य द्वारा की जाने वाली यात्राओं के लिए केन्द्र सरकार के सहायक नियमों के अनुसार यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता दिया जायेगा।
 
स. समिति के पास आवश्यकतानुसार निवेश के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की सलाह लेने, उनकी नियुक्ति करने/उन्हें पारिश्रमिक देने का अधिकार होगा। 
 
द.  समिति के पास निधि के साथ पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा खातों की जाच और अंकेक्षण करने के लिए अंकेक्षक नियुक्त करने का अधिकार होगा।
 

6. खातों का अंकेक्षण
 
निधि के खातों का कम्पनी मामले मंत्रालय के आन्तरिक अंकेक्षण दल द्वारा हर वर्ष अंकेक्षण किया जाना चाहिए। इन खातों का अंकेक्षण भारत के महालेखापरीक्षक कार्यालय द्वारा भी किया जायेगा।
 
7. समिति का संविधान और कार्य 
 

   अ.

समिति में 10 सदस्य होंगे, जिनमें अध्यक्ष, जो कि कम्पनी मामले विभाग का सचिव होता है शामिल नहीं होगा। सदस्यों का नामांकन भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड और या भारत सरकार के किसी अन्य मंत्रालय या विभाग, जो निवेशक सुरक्षा के मामलों से जुड़ा हो द्वारा निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों में से किया जाता है। गैर–अधिकारिक सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। अधिकारिक सदस्य दो साल या अपने पद पर बने रहने तक, जो भी पहले हो कार्यरत रहेंगे। समिति का संविधान राजकीय राजपत्र में अधिसूचित होगा। 
 
 

   ब. समिति के कार्य:
 
   1.

समिति निवेशक शिक्षा, जागरूकता एवं सुरक्षा से सम्बन्धित निम्नलिखित गतिविधियों को संस्तुत करेगी: 

    अ. मीडिया के माध्यम से शिक्षण कार्यक्रम 
    ब. विचारगोष्ठियां और संगोष्ठियों का आयोजन
    स.

निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा गतिविधियों में संलग्न स्वयंसेवी संगठनों या अन्य संगठनों के पंजीकरण के लिए प्रस्ताव

    द.

निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा की परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव, अनुसंधान गतिविधियों सहित और ऐसी परियोजनाओं के वित्तीय  आर्थिक भार उठाने के लिए

    य.  निवेशक शिक्षा, जागरूकता और सुरक्षा गतिविधियों में संलग्न संस्थानों के साथ समन्वयन
     र.
1.

समिति निधि के कार्यों के कुशल संचालन के लिए आवश्यकता पड़ने पर एक या अधिक उपसमितियां नियुक्त कर सकती है।

2.  उपसमिति का गठन सदस्यों में से ही होगा।
3. समिति का अध्यक्ष उपसमिति के किसी भी सदस्य को उपसमिति का संयोजक नियुक्त कर सकता है और यदि अध्यक्ष किसी का नामांकन न कर पाये, तब उपसमिति के सदस्य ही अपने में से किसी एक को संयोजक बनायेंगे।
4. समिति अनुदानों के उपयोग की जांच और इसमें सहयोग करने के साथ करने के साथ, निधि जारी के लिए संस्तुति देने में सलाह देने के लिए उपसमिति बना सकती है।
       

  

8. कम्पनी से मांग करने की शक्ति:
 
1.     समिति के पास किसी भी कम्पनी को निधि को देय राशि का भुगतान करने हेतु बाध्य करने का अधिकार है।
2.     समिति किसी भी कम्पनी को फॉर्म 2 में निधि में जमा करने योग्य राशि का अनुमान देने के लिए बुला सकती है। 

9. समिति की रिपोट‍र् 
समिति केन्द्र सरकार को हर छ: महीने में अपनी गतिविधियों की रिपोट‍र् सौंपेगी।

 
10. बैठकें
 
1.    

समिति की बैठक के लिए कुल सदस्यों के एकतिहाई सदस्यों या कम से कम पांच सदस्यों और उपसमिति की बैठक के लिए कम से कम तीन सदस्यों से ही कोरम का गठन होगा।

2.    

समिति का अध्यक्ष और उपसमिति का संयोजक ही क्रमश: समिति और उपसमिति की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। यदि अध्यक्ष या संयोजक बैठक में उपस्थित नहीं हो पाता है,तब सदस्य आपसी सहमति से किसी एक सदस्य को बैठक का अध्यक्ष चुन सकते हैं।

3.    

समिति का अध्यक्ष समिति की और उपसमिति का संयोजक उपसमिति की बैठक बुला सकता है। 
 

 

बशर्ते कि समिति के अध्यक्ष के पास कम से कम पांच सदस्यों ने और उपसमिति के मामले में संयोजक के पास कम से कम तीन सदस्यों ने बैठक बुलाने का प्रस्ताव पेश किया हो। 
 

4.    

बैठक होने से पहले कम से कम 14 दिन पहले बैठक की सूचना के साथ बैठक का समय, तिथि और स्थल की जानकारी समिति और उपसमिति के सभी सदस्यों को भेजी जानी होगी। 
 

  विशेष मसलों पर विचार करने के लिए समिति या उपसमिति की विशेष बैठकें भी बुलायी जा सकती हैं। ये बैठकें अध्यक्ष या संयोजक द्वारा कभी भी बुलायी जा सकती हैं। इनके लिए पूरे 3 दिन की अग्रिम सूचना विशेष बैठक बुलाने के कारणों सहित पर्याप्त होगी। बशर्ते कि उस बैठक में कोई और कार्य न किया जाये। 
 
5.

अध्यक्ष या संयोजक, बुलायी गई बैठकों में किसी भी व्यक्ति को विशेष आमंत्री के रूप में उपस्थित होने को कह सकते हैं। ऐसा व्यक्ति बैठक में मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता है। 
 

11. कार्यसूची या एजेण्डा
 
1.    

समिति या उपसमिति की बैठक से कम से कम सात दिन पहले नियम 10 के उपनियम 4. में वर्णित विशेष बैठक के मामले को छोड़कर बैठक में होने वाले विचार–विमर्श या कामकाज की सूची यानि बैठक का एजेण्डा समिति या उपसमिति, जो भी दशा लागू हो, के सदस्यों को भेजी जायेगी।

2.    

कार्यसूची या एजेण्डे में शामिल नहीं किये गये विशय पर बिना बैठक के अध्यक्ष या संयोजक की अनुमति के चर्चा नहीं की जायेगी। 
 

12. मतदान
 
1.    

समिति या उपसमिति की बैठक में उठाये गये हर प्रश्न पर बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा मतदान करके बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जायेगा। कोई सदस्य अपना मताधिकार किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देगा।

2.    

यदि किसी मसले पर मत दो बराबर भागों में विभक्त हो जाते हैं, तब बैठक की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति के पास दूसरा मत या निर्णायक मत देने का अधिकार होगा। 
 

13. बैठक विवरण
 
समिति या उपसमिति की बैठक में उठाये गये मसलों का विवरण तैयार किया जायेगा और उसे सदस्यों को भेजा जायेगा। 
 
14. समिति द्वारा निर्धारित निधियां इस्तेमाल करने की शर्तें: 
 

1.     समिति निवेशक शिक्षण कार्यक्रमों, निवेशक जागरूता एवं सुरक्षा मुद्दों पर विचारगोश्ठियों, कार्यशालाओं, अनुसंधान गतिविधियों आदि के आयोजन हेतु समय–समय पर निवेशक जागरूकता, शिक्षा एवं सुरक्षा से जुडी गतिविधियों में संलग्न विभिन्न संस्थाओं और संस्थानों का पंजीकरण कर सकता है।
2.     ऐसे संगठनों को उपनियम 1. के अनुसार फॉर्म–3 में पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा।
3.     नियम 7(1) में सूचीबद्ध गतिविधियों के लिए कम्पनी मामले विभाग में पंजीकृत संगठनों एवं संस्थानों से अनुदान हेतु आवेदन फॅार्म–4 में प्राप्त किये जायेंगे।
4.     पंजीकृत संस्थाओं या चैम्बर आफ कॉमर्स या संस्थानों जैसे संगठनों द्वारा आयोजित संगोश्ठी या कार्यक्रम संस्तुतियों का सारांश और ऐसी गतिविधियों के खातों की प्रति कार्यक्रम पूर्ण होने के 10 दिनों की अवधि के अन्दर समिति भेजी जानी होगी।
5.     पंजीकृत संगठन या संघ अनुदान–सहायता के रूप में अनुदान के लिए एकमुश्त या चरणबद्ध तरीके से या फिर प्रस्तावित गतिविधि के स्वभाव के अनुसार भुगतान हेतु विचारणीय होंगे।
6.     समिति के पास अनुदान देने से पूर्व अनुदान के उद्देश्य की जांच करने का अधिकार होगा।
7.     समिति को हर वित्तीय वर्श के अन्त में कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 205सी में वर्णित विभिन्न स्रोतों से हुई कुल प्राप्तियों, वितरित अनुदान या समिति या उपसमिति द्वारा आयोजित गतिविधियों के सम्बन्ध में किये गये व्यय और विभिन्न बैठकों के आयोजन पर हुए व्यय का विवरण बनाना होगा।
8.     समिति को वितरित अनुदान राशियों, वितरण तिथि, संगठन या स्वयंसेवी संगठनों के नाम, उनके द्वारा संचालित गतिविधियों के आवश्यक विवरण रखने होंगे।
 
 

सम्पर्क करें | डिस्क्लेमर | प्रतिक्रिया | होम पेज
इस साइट को 800*600 पटल पर इंटरनेट एक्सप्लोरर 5.0+ या नेटस्केप 4.7+ के द्वारा बेहतर देख सकते हैं।