निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि
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श्री सलमान खुर्शीद
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सूचकांक निधि
स्रोत : एनएसई

भूमिका

सूचकांक क्या है?
कोई भी सूचकांक किसी व्यवस्था या फिर वित्तीय बाजार की जानकारी देने में इस्तेमाल होता है। वित्तीय सूचकांक को इस तरह तैयार किया गया है जिससे स्टॉक की कीमतों में उतार-चढ़ाव, बॉन्ड और अन्य निवेशों का आकलन आसानी से किया जा सके। स्टॉक बाजार सूचकांक से शेयर बाजार के हलचल को समझा जा सकता है। ये स्टॉक के समूहों द्वारा बनता है जो कि पूरे बाजार या फिर निश्चित क्षेत्र या हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। किसी भी सूचकांक की गणना आधार अविध और आधार सूचकांक के मूल्यांकन के आधार पर होती है।
 
सूचकांक की उपयोगिता क्या है?
   पारम्पिरक उपयोगिता
बाजार के हलचल/प्रतिफल का सूचक।
सूचकांक उच्चस्तरीय ताजा जानकारी को दर्शाता है।
अर्थव्यवस्था का प्रमुख सूचक।
 
   उच्चस्तरीय उपयोगिता
सूचकांक निधि – निष्क्रिय कोष प्रबंधन
सूचकांक डेरिवेटिव्स – सूचकांक भविष्य और सूचकांक विकल्प

सूचीकरण क्या है?
सूचीकरण से किसी निश्चित स्टॉक में निवेश पर मुनाफा,बाजार मानदण्ड या फिर सूचकांक में निवेश की स्थिति को दर्शाया जाता है। सूचीकरण के वक्त निवेश प्रबन्धक सभी सूचकांकों को देखते हुए निश्चित सूचकांक में निवेश के परिणाम को दुहराने की कोशिश करता है,या फिर बड़े सूचकांको की स्थिति में प्रतिभूतियों के सूचकांक के प्रतिनिधि नमूने को देखता है। चालू पैसे के प्रबन्ध में पारम्पिरक उपयोगिता या फिर विशेष स्टॅाक पर दांव लगाना या उद्योग क्षेत्र को संकीर्ण कर सूचकांक को आगे निकालने जैसी पद्धती को इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इस प्रकार सूचीकरण एक निष्क्रिय निवेश प्रक्रिया है जिसमें व्यापक विविधता और निम्न निवेश सूची वाले व्यापारिक गतिविधियों पर बल दिया जाता है।

सूचकांक कोष एक म्युचुअल फंड योजना है जिसमें निश्चित सूचकांक के अनुपात में प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है। हालांकि इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि ये बेंचमार्क सूचकांक,सूचकांक कोष में निवेश के लाभ के साथ कोष सम्पत्ति से जुड़े हुए सभी दायित्व या खतरों का आकलन कर सके। इसिलए जब भी स्टॅाक बाजार में मंदी का दौर आता है तब ये उम्मीद की जा सकती है कि स्टॉक सूचकांक कोष के शेयरों की किमतें भी गिरेगी। संक्षेप में सूचकांक कोष बाजार के खतरों को कम नहीं करता है और ये संभावना रहती है कि प्रतिभूति या स्टॉक के पूरे बाजार में भी गिरावट आयेगी। सूचीकरण या अनुक्रमण केवल यह सुनिश्चित करता है कि आपका लाभ सूचकांक के कोष के लाभ से ज्यादा अन्तर पर नहीं होगा।

अनुक्रिमत प्रबंधन का आधारभूत पूर्वानुमान यह है कि वित्तीय बाजार लम्बे समय पर सक्षम है और प्रबंधकों के लिए बाजार में सामान्य तौर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करना लगभग मुश्किल है। इन्हीं वजहों से सूचीकरण संगिठत पेंशन कोष प्रबंधको के बीच ज्यादा प्रचिलत है जो कि लगातार लम्बी अविध और कम खतरे वाले निवेशों में लगातार लाभ कमाने की रणनीति पर काम करते हैं।

सूचकांक कोष का विकास

अमेरिका में शेयर बाजार के विकसित होने के साथ ही ये ज्यादा जिटल हो गया और कोष प्रबंधकों के लिए ज्यादा मुश्किल हो गया कि वे सूचकांक के व्यापारिक कीमत, ब्रोकर के कमीशन, बाजार के फैलाव और करों के जाल में अच्छा प्रदर्शन कर सकें। यह देखा गया है कि पिछले 20 सालों में एस एण्ड पी 500 में 85 प्रतिशत से ज्यादा कोष प्रबंधकों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। इन सब के बावजूद म्युचुअल फंड के बाजार का आकार बढ़ा है और ये कहना मुश्किल होगा कि सूचकांक में जिन कोष प्रबंधकों ने इस साल अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है वो आगे भी ऐसा ही करेंगे। इन बातों को ध्यान में रखते हुए ऐसा महसूस किया गया कि सूचकांक को लगातार मात देना मुश्किल है लेकिन कम से कम सूचकांक से फायदे तो मिलते ही रहें।

ऐसे में कई निवेश प्रबंधक सूचकांक के अनुपात में स्टॉक खरीदते हैं,और ऐसा ये जानबूझ कर करते हैं या फिर बस यूं ही। इसके परिणामस्वरूप ये पद्धित बन्द या गुप्त सूचीकरण के नाम से जाने जानी लगी। इसके साथ ही निष्क्रिय खरीद और निवेश सूची को कम लेन देन के दर पर रोके रखने और निवेश सूची के खतरे पर ज्यादा नियंत्रण का विचार विकसित हुआ। इन सभी कारणों के साथ–साथ तकनीकी उन्नित ने सूचकांक कोष के विकास की नींव रखी। फार्गो बैंक ने सूचकांक कोष की अगुवाई करते हुए पहली बार 1971 में सेम्सोनाईट पेंशन कोष के साथ मिलकर 6 मिलियन डालर का उत्पाद पेश किया।

इसके बाद सूचकांक कोष का ये विकास पूरी दुनिया के संस्थागत निवेशकों द्वारा शेयरों में निवेश का एक साधारण परिणाम बना। हालांकि अमेरिकी बाजार में सूचकांक कोष और सूचकांक उत्पादों ने 1996 के बाद ही तेजी पकड़ी।

सूचीकरण क्यों?
सक्रिय प्रबंधन कोष के मुकाबले सूचकांक कोष कई मामलों में बेहतर है :
   1. कम खर्च का अनुपात
   2. लेनदेन की दर कम
   3. विविधता द्वारा खतरे को बेहतर तरीके से काबू में रखना
   4. बाजार को लगातार मात देने में कठिनाई
   5. कोष प्रबंधक के प्रदर्शन के जोखिम की संभावना कम

  1. कम खर्च : सूचकांक कोष सक्रिय रूप से प्रबंधकीय कोष के मुकाबले कम खर्चीला निवेश है। सूचकांक कोष में खर्चीले प्रबंधकों और सुरक्षा विश्लेषण के लिए विश्लेषकों की जरूरत नहीं होती है। सूचकांक कोष के निवेश सूची के प्रबंधन में सक्रिय प्रबंधन कोष के मुकाबले कम मेहनत होती है।

  2. लेन देन की लागत :  जब भी कोई बाजार में शेयरों की खरीद या बिक्री के लिए प्रवेश करता है तो उस पर शुल्क देय होता है। लेन–देन की लागत दो कारकों पर निर्भर करता है :–  

    • प्रत्येक लेन–देन पर सामान्य लागत : इसमें ब्रोकर के कमीशन के साथ छुपे हुए अन्य लागत भी जुड़े हुए होते हैं जो कि प्रभाव लागत होते हैं। प्रभाव लागत आदर्श मूल्य के उपर का प्रतिशत का गिरावट होता है। चालू प्रतिभूति के लिए यह दर कम होती है जबकि स्थायी के लिए ज्यादा होती है।

    • निवेश सूची कारोबार : सूचकांक कोष का मकसद सूचकांक की नकल करना है। इसमें कोष प्रबंधक को चालू कोष प्रबंधन की तरह अपने निवेश सूची में लगातार परिवर्तन की जरूरत नहीं पड़ती है। इसमें निवेश सूची में तब परिवर्तन की आवश्यकता पड़ती है जब मौलिक सूचकांक में कोई अन्तर आये।  

    इस प्रकार से सूचकांक कोष एक कम लागत का सिद्धान्त है। ये बचत लम्बे समय के लिए होता है  
    जिसमें निवशक को वांछित मुनाफा होता है।

  3. विविधीकरण के जरिए कम जोखिम : बाजार सूचकांक को इस तरह से तैयार किया गया है जिससे ये पूरे स्टॅाक बाजार के प्रदर्शन को दर्शाये। सूचकांक का मूल अर्थव्यवस्था में अलग अलग क्षेत्रों के बड़े और चालू उद्योगों को दर्शाता है। इसमें विविधता द्वारा किसी विशेष उद्योग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

  4. लगातार बाजार को मात देने में कठिनाइयां : हालांकि कोष प्रबंधक कुछ एक सालों तक बाजार को मात देने में सफल रहे,लेकिन ये कहना मुश्किल होगा कि आने वाले सालों में भी लगातार ये ऐसा कर पायेंगे। इसके अलावा सूचकांक प्रबंधन में ये धारणा है कि वित्तीय बाजार लम्बी अवधी में सक्षम है क्योंकि ये संभव नहीं है कि एक प्रबंधक बाजार के अनुपात में लगातार अच्छा प्रदर्शन करे। अमेरिकी बाजारों के अनुभव के अनुसार यह देखा गया है कि पिछले 20 सालों में एस एण्ड पी 500 में 80 प्रतिशत से ज्यादा कोष प्रबंधकों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है।


     

  5. कोष प्रबंधकों के प्रदर्शन के जोखिम की कम संभावना : एक सूचकांक कोष प्रबंधक का काम सूचकांको पर बारिकी से नजर रखने तक सीमित है। सक्रिय रूप से प्रबंधित कोष में निवेश,कोष प्रबंधकों के प्रदर्शन पर टिका हुआ होता है। इसिलए सक्रिय रूप से प्रबंधित कोष पूरी तरह से कोष प्रबंधकों के प्रदर्शन खतरे के दांव पर लगा हुआ होता है।  

सूचकांक कोष के प्रकार

पूरी तरह से दुहराया कोष : इस कोष में चुने हुए सूचकांक के मूल को सूचकांक के अनुपात में रखा जाता है। इस तरह के कोष में ट्रैकिंग त्रुटी की संभावना कम रहती है।

नमूना कोष : अगर बेंचमार्क सूचकांक का आकार बड़ा हो तो पूरी तरह से दुहराये कोष में बड़े वािर्षक रखरखाव की लागत दर भी ज्यादा होगी। ऐसी स्थिति में पूरे सूचकांक से निर्धारित सूचकांक के सैम्पल को चुनना ज्यादा आसान और फायदेमंद होगा। सैम्पिलंग के जरिए लेन–देन के लागत को तो कम किया जा सकता है लेकिन ट्रेकिंग में ज्यादा त्रुटी होने की संभावना बनी रहती है।

सूचकांक कोष बनाम गैर सूचकांक कोष

 

सूचकांक कोष

गैर सूचकांक कोष

1.

इस कोष का मकसद लक्ष्य सूचकांक का अनुकरण करना है।

इस कोष का मकसद निधरिषरत सूचकांक को मात देना है।

2.

यह निष्क्रिय प्रबंधित कोष के रूप में जाना जाता है। सूचकांक कोष के प्रबंधन की प्रक्रिया में किसी भी मूलभूत ाोध को शामिल नहीं किया जाता है। इस कोष में ट्रेडिंग का स्तर काफी नीचे रहता है।

यह सक्रिय रूप से प्रबंधित कोष के रूप में जाना जाता है। गैर सूचकांक कोष के प्रबंधन की प्रक्रिया में मूलभूत कोष और गुणात्मक विश्लेषण द्वारा प्रतिभूतियों को पहचाना जाता है, जिसे कि अपने मनवंाछित उदद्श्य के लिए खरीदा या बेचा जा सके।

3.

इसमें टारगेट सूचकांक और सूचकांक कोष को डिजाइन करने के लिए विशेषज्ञता की जरूरत होती है जिससे चुने हुए सूचकांक के लक्षण मिल सकें।

इसमें बेहतर पुर्वानुमान की जरूरत होती है ताकि प्रतिभूतियों को खरीदने और बेचने का वक्त निर्धारित किया जा सके।

4.

सूचकांक कोष के निवेशक कम जोखिम उठाने वाले होते हैं। क्योंकि सूचकांक की निवेश सूची अलग–अलग होती है और सूचकांक के अनुपात में ही सूचकांक कोष में स्टॉक को रखा जाता है और ये कम जोखिम वाला होता है।

गैर सूचकांक कोष की निवेश सूची कोष प्रबंधक के फैसले के अनुसार होती है। इस निवेश सूची की सफलता पूरी तरह से कोष प्रबंधको की क्षमता पर निर्भर करता है।

5.

सूचकांक कोष प्रबंधक का काम सूचकांक को नजदीक से ट्रैक करना होता है। इन्हें सूचकांक को ध्यान में रखते हुए निवेश सूची को वक्त–वक्त पर व्यविस्थत करना होता है

गैर सूचकांक कोष प्रबंधक का काम ऐसे स्टॅाक को उठाना है जिसमें यह भरोसा हो कि सूचकांक के तुलना में यह निर्धारित लक्ष्य को बेहतर प्राप्त कर सकेगा।

6.

सुचकांक कोष के खर्च का अनुपात कम होता है। सूचकांक कोष में खरीदने और फिर उसे रोके रखने कि नीति पर काम होता है और इसिलए इस स्टॉक के कारोबार की लेन–देन लागत कम होती है।

इसमें खर्च का अनुपात ज्यादा होता है। बाजार के आधार पर कभी–कभी निवेश सूची का मंथन हो जाता है जिससे उच्च लागत के साथ व्यापारिक खर्च भी बढ़ जाता है।

7.

कोष पर लाभांश पूरे शेयर बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।

कोष पर लाभांश कोष प्रबंधक के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।

ट्रैंकिंग त्रुटि
ट्रैकिंग त्रुटि को सूचकांक कोष और इसके निर्धारित कोष के सलाना मानक वार्षिक अंतर के फायदों के आधार पर परिभाषित किया जाता है। साधारण ाब्दों में ये सूचकांक कोष और सूचकांक से मिलने वाले फायदों का अन्तर है। सूचकांक कोष प्रबंधक को अपने ट्रैकिंग त्रुटि की गणना रोज के आधार पर करने की जरूरत पड़ती है खासकर खुले फंड के लिए। ट्रैकिंग त्रुटि जितनी कम होगी कोष के मुनाफे लक्ष्य कोष के उतने ही पास होंगे। ट्रैकिंग त्रुटि को हमेशा सूचकांक के कुल मुनाफे के विपरीत आंका जाता है जो कि सूचकांक निवेश सूची लाभांश के साथ को दर्शाता है।

ट्रैंकिंग त्रुटि के संकेत

1.

सूचकांक को कोष कैसे बारीकी से ट्रैक करता है : ये दिखाता है कि निवेश सूची के स्टॉक सूचकांक के स्टॉक के कितने करीब हैं। ये स्टॉक सूचकांक के जितने करीबी से ट्रैक होते हैं ट्रैकिंग त्रुटि की संभावना उतनी ही कम होती है। ट्रैकिंग त्रुटि कुछ कारको पर निर्भर करता है जैसे कोष का प्रवाह, उद्योगों की कार्यशैली, सूचकांक के मूल में अन्तर और खुले तौर पर कोष में नगद के रखरखाव।

2.

कोष के मुनाफे में नियिमत रूप से लागत का घटना : खर्च जैसे कि लेनदेन लागत ब्रोकर का किमशन, निविदा इत्यादि को कोष के मुनाफे से घटाया जाता है। जितना ज्यादा खर्च होगा ट्रैकिंग त्रुटि उतनी ही ज्यादा होगी।


 
ट्रैंकिंग त्रुटि की गणना
1 : नेव का मुल्य और टी आर सूचकांक मूल्य को रोज कुल समय सीमा तक प्राप्त करें।
2 : रोजाना पिछले दिनों के नेव और टी आर सूचकांक के प्रतिशत के अन्तर की गणना करें।


नेव का प्रतिशत में बदलाव

    नेव (t) दिन पर नेव (t-1) दिन पर
= ----------------------------------------
                
नेव (t-1) दिन पर

3 : नेव और टीआर सूचकांक के बीच के प्रतिशत अन्तर की रोज गणना करें।
4 : 1 दिन और एन दिन के बीच मानक परिवर्तन के अंतर की गणना करें।
5 : नीचे दिये गये फामु‍र्ला के आधार पर सलाना ट्रैकिंग त्रुटि की गणना करें।
 
  सालाना ट्रैकिंग त्रुटि – प्राप्त मानक परिवर्तन (Step 4) * sqrt (250)
 

सही सूचकांक का चुनाव
सूचकांक कोष का मुख्य लक्ष्य निर्धारित सूचकांक के मुनाफे के करीब रहना है। इसके लिए जरूरी है कि सही सूचकांक का चुनाव किया जाए। आज दुनिया के ज्यादातर मामलों में बाजार के सूचकांक का साल पहले सृजन हो जाता है वो भी वैसे वातावरण में जहां सीमित जानकारियों के साथ खराब परिकलन और वित्तीय अर्थव्यवस्था का सीमित ज्ञान हो। हालांकि इन तीनों कारकों में आज काफी फेरबदल हो चुका है। पिछले दो दर्शकों में तकनीकी में आई क्रांति सूचकांक कोष में शोध और सूचकांक डेरिवेटिव ने सूचकांक के निर्माण को एक नयी दिशा दी है।

हर शेयर बाजार सूचकांक विविधीकरण और तरलता के बीच का व्यापार है। छोटे बाजार के सूचकांक तरल तो होते हैं लेकिन इसमें विविधता नहीं होती है जबकि बड़ें बाजार के सूचकांक में भिन्नता होती है हालांकि ये तरल नहीं होते हैं। इसिलए जिस सूचकांक में दोनों का मिश्रण होता है वही बेहतर सूचकांक होता है। एक अच्छे सूचकांक की विशेषताएं इस प्रकार होनी चाहिए :–
   •  बाजार का प्रतिनिधित्व
   •  भिन्नता अच्छी हो
   •  अति तरल
   •  कुल लाभ की गणना
   •  पेशेवर प्रबंधन

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी
एस एण्ड पी सीएनएक्स भारत में एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी सबसे वैधानिक सूचकांक है जिसे सूचकांक कोष और सूचकांक संजात को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आधार साल 3 नवम्बर 1995 के आधार पर एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी बाजार के पूंजी का भारक सूचकांक है। इसका आधार मूल्य 1000 निर्धारित किया गया। एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी एक घटना संचालित सूचकांक है जिसमें किसी भी सूचकांक प्रतिभूति के दर में बदलाव से सूचकांक में बदलाव होता है। ये निर्धारित सूचकांक के खाते में बदलाव और मुख्यत: उद्योगों के कार्यकलाप जैसे की शेयर विभाजन, अधिकार इत्यादि को भी रखता है, बिना सूचकांक के मूल्य में बदलाव के। सूचीकरण के मकसद से बाजार की पूंजी के अनुसार सूचकांक प्रत्येक दिन के कोष के प्रबंधन की सुविधा भी प्रदान करता है। बाजार में आये उतार और चढ़ाव के अनुसार सूचकांक कोष भी लक्ष्य सूचकांक के अनुसार बढ़ता घटता है। बाजार मूल्य परिवर्तन के बाद रिबैलेंसिंग की कोई जरूरत नहीं होती है, लेकिन लेनदेन की संख्या में बचत की वजह से लेनदेन का खर्च घटता है।

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी को तैयार करते वक्त एक ऐसी विधि को लागू किया गया जो सूचकांक बनाने के चार मुख्य कारकों की अच्छी तरह से समाधान कर सके।
 

सूचकांक सेट का विकास
भारत का औद्योगिक क्षेत्र सक्रिय है : पुराने उद्योग निष्क्रिय हो जाते है और आई पी ओ (जैसे सरकारी उपक्रम जिसका विनिवेश किया गया हो) जल्द ही देश के बड़े उद्योग घरानों में शामिल हो जाते हैं।
 

पुरानी कीमतों की समस्या
एक निश्चित समय पर बाजार के स्थिति की जानकारी बाजार के सूचकांक को देना चाहिए – जब कोई घटक बार बार व्यापार करे तो ये अपने इस उद्द्श्य से भटक जाते है। गैर समकालिक व्यापार के दिक्कतों को कम करने के लिए कड़े तरलीय शर्तों को लागू करना चाहिए और इसका चरम संस्करण गैर व्यापार होता है।
 
सूचकांक सेट का आकार
क्या सूचकांक सेट में शेयर 30, 50, 100 या फिर 3000 तक होना चाहिए? सेट के आकार के चुनाव के लिए हमारे पास स्पष्ट गुणात्मक आधार होना चाहिए।
 
आधुनिक प्रयोग
सूचकांक में इतनी तरलता होनी चाहिए जो की आधुनिक अनुप्रयोगों जैसे कि सूचकांक कोष और सूचकांक संजात में अच्छी तरह से मेल खाये और इन दोनों में जरूरत है कि पूरा सूचकांक सेट का व्यापार निवेश सूची की तरह से हो।

सूचकांक समिति में जाने माने अर्थव्यवस्था के क्षेत्र के लोगों को होना जरूरी है जैसे कि म्यूचअल फंड प्रबंधक, ट्रेडिंग सदस्य, शिक्षाविद और वैसे लोग जो की खास तौर पर विदेशों के भविष्य और विकल्प वाले बाजार एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी में व्यापार करते हों। ताकि पूरे बाजार का अच्छी तरह से प्रतिनिधित्व हो सके और कोई भी निवेश सूची का उच्च प्रभावित हो और लेनदेन का प्रभाव लागत कम हो सके।

समिति द्वारा जो बड़े परिणाम निकले उसमें देखा गया कि सूचकांक में 50 की संख्या को आदर्श माना गया और इसकी तरलता को प्रभाव लागत के आधार पर परखा गया। सूचकांक में ज्यादा संख्या में शेयरों को रखने के लिए ज्यादा विविधता की जरूरत होती है। हालांकि ऐसा ज्यादा करने पर दो चीजें गलत हो सकती है। पहला, विविधता से मुनाफे में गिरावट। 10 से 20 शेयरों के बीच में जोखिम काफी कम होता है। 50 से 100 शेयरों के बीच में जोखिम के आसार बढ़ जाते हैं और 100 शेयर के उपर जोखिम की संभावना पूरी होती है। जबकि एक निश्चित बिन्दु के बाद विविधता से काफी कम फायदा होता है। इसमें सबसे बड़ी समस्या विविधता की वजह से अतरलीय शेयरों को शामिल होना है।

संपति की तरलता एक निवेशक के लिए महत्वपूर्ण मानदंडों में से एक है। डेरिवेटिव बाजार में निवेशक अपने निवेश की तरलता को लेकर ज्यादा गंभीर होते हैं। एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी की सभी प्रतिभूतियां काफी तरल होते हैं। एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी की तरलता इसिलए अहम है क्योंकि पुरानी कीमतों का असर कम होता है और भविष्य के क्रय विक्रय को बढ़ता है।

कई प्रकार के उपायों जैसे कि कारोबार की मात्रा, कारोबार का अन्तराल, बोली आदि का इस्तेमाल तरलता को बढ़ाने में होता हैं। निफ्टी के प्रतिभूति को मापने के लिए इसके प्रभाव लागत की गणना की जाती है। प्रतिभूति के प्रभाव लागत में बाजार में किसी भी समय मौजूदा आधार पर लिए गये प्रतिभूति के कारोबार की कीमत का संभावित निवेश सूची के भार के अनुपात में लागत निकाली जाती है।

चुनाव की विधि
सूचकांक में शामिल उद्योगों का बाजार पूंजी निवेश कम से कम 5 अरब या फिर इससे ज्यादा हो।
सूचकांक में प्रवेश करने वाले कम्पिनयों का बाजार पूंजी सूचकांक से बाहर निकले कम्पिनयों से दुगना होनी चाहिए।
 
तरलता (प्रभाव लागत)
सभी प्रतिभूतियां प्रभाव लागत के लिए व्यापार के दिन 90 प्रतिशत तक का और पिछले 6 माह में 0.75 प्रतिशत से कम तक के प्रभाव को पूरा करना चाहिए।

कुल रिटर्न सूचकांक
कुल रिटर्न सूचकांक की गणना एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी पर की जाती है। ये सूचकांक लाभांश के साथ सूचकांक के निवेश सूची पर मिले रिटर्न को दर्शाता है। निफ्टी सूचकांक और टी आर सूचकांक समयान्तराल पर लाभांश द्वारा पुन: निवेश पर दिये गये समय में प्राप्त मुनाफे के बीच का अन्तर है। इसिलए यह एक आदर्श बेंचमार्क है वैसे सूचकांक कोष के लिए जो कि लाभांश प्राप्त करता है और दुबारा निवेश के लिए प्रोत्साहित करता है।

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी की गणना विधि
एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी आधार की गणना बाजार के पूंजी के भार के विधि पर होती है जिसमें पूरे बाजार के सूचकांक के स्तर को आधार समय 3 नवम्बर 1995 के आधार पर सूचकांक के सभी शेयर के मुकाबले प्रर्दिशत करता है। कम्पनी का कुल बाजार पूंजी या फिर बाजार का पूंजीकरण वो है जिसमें उत्पाद के कुल बाजार की कीमत और कम्पनी के सभी बकाया शेयरों की संख्या है।

बाजार का पूंजीकरण त्र बकाया इक्वीटी पूंजी *मूल्य

इस विधि में इसका महत्व स्थायी नहीं होता है, ये शेयरों की कीमत और बकाया शेयरों की संख्या के बदलाव के अनुसार बदलता है। निफ्टी के सभी चुने हुए प्रतिभूति का भार बाजार के पूंजीकरण के अनुपात में होता है।

सामान्य सूचकांक फार्मूला की गणना

आधार पूंजीकरण विधि

                       मौजूदा बाजार की पूंजी
सूचकांक मूल्य = ------------------------ * आधार सूचकांक मूल्य (1000)
                        बाजार की आधार पूंजी

सूचकांक, आधार पूंजी बाजार में आधार समय के दौरान सूचकांक के प्रत्येक शेयर के बाजार पूंजीकरण का कुल योग है। आधार समय के दौरान बाजार की पूंजी 1000 के सूचकांक मूल्य जो कि आधार सूचकांक मूल्य है के आधार पर जोड़ा जाता है।

सूचकांक के मौजूदा बाजार की पूंजी,मौजूदा समय में सूचकांक के सभी शेयरों के पूंजी का जोड़ है। सूचकांक के मौजूदा पूंजी बाजार के जोड़ के लिए सभी शेयरों के मौजूदा कीमत से बकाया शेयरों की कीमत को गुणा कर दिया जाता है।

दिये गये किसी भी समय में सूचकांक स्तर निवेश सूची के कुल मौजूदा बाजार मूल्य के बराबर होता है, इसे आधार समय के बाजार मूल्य भाग कर दिया जाता है और आधार सूचकांक मूल्य से गुणा किया जाता है। 1500 का निफ्टी सूचकांक स्तर ये दर्शाता है कि निवेश सूची का कुल मूल्य आधार समय के अन्तराल पर 50 प्रतिशत तक बढ़ा है।

सूचकांक कोष को बनाए रखना
सूचकांक कोष द्वारा सूचकांक में प्रतिभूतियों के भार को ट्रेक किया जाता है। सूचकांक कोष में प्रतिभूतियों के भार को दो कारणों से दुबारा संतुलित करने की जरूरत होती है।
   1.  औद्योगिक कार्य और सूचकांक सेट में परिवर्तन
   2.  कोष के आगमन और प्रवाह के लिए

सबसे पहले हम देखेंगे कि कैसे सूचकांक में औद्योगिक कार्य को समन्वय किया जाए और उसके बाद सूचकांक कोष को कैसे दुबारा से समान किया जाए।

औद्योगिक गतिविधियां
उद्योगों की मौजूदा बाजार पूंजी,बकाया शेयरों की संख्या और मौजूदा बाजार मूल्य का रूप है। उद्योग का बाजार पूंजी बदल सकता है और इन दोनों में बदलाव हो –
   •  मूल्य
   •  बकाया शेयरों की संख्या में बदलाव

जबकि शेयर सूचकांक में बदलाव कम्पनी के बाजार पूंजी में बदलाव को दिखाता है और इसका कारण शेयर के मूल्यों में बदलाव है न कि कम्पनी के बकाया शेयरों की संख्या में बदलाव। इसिलए उद्योगों का कोई भी कार्य बाजार पूंजी में बदलाव लाता है क्योंकि बकाया शेयरों की संख्या में बदलाव के लिए सूचकांक आधार पूंजी को समान करने की जरूरत होती है। सूचकांक में बदलाव को ऐसे किया जाता है जिससे सूचकांक का मूल्य स्थिर रहे।
 
कॉरपोरेट कार्य जैसे कि राइट इश्यू विलय और अधिग्रहण, ऋण रूपान्तरण की वजहों से कम्पनी के बकाया शेयरों की संख्या में बदलाव आता है। बाजार पूंजी की विधि ऐसे कॉरपोरेट कार्यों को बराबर करता है िबना सूचकांक में किसी बदलाव के। जब सूचकांक की सुरक्षा के लिए ऐसे कार्य किये जाते है तब उसका असर सूचकांक भाजक या आधार पूंजीकरण द्वारा दिखता है और सूचकांक के गणना के लिए इसकी जरूरत पड़ती है।  
बाजार के मूल्य में बदलाव के लिए सूचकांक भाजक या आधार पूंजीकरण के समायोजन किया जाता है जबकि सूचकांक को मूल्य स्थिर रहता है।

सूचकांक में आई आई एस एल निम्नलिखित तरह के बदलाव लाते हैं :–

सूचकांक के आधार बाजार पूंजीकरण को दुहराया जाता है ताकि कॉरपोरेट कार्यों की वजह से बकाया शेयरों में आये बदलाव को दुबारा समायोजित किया जा सके।

आधार बाजार पूंजीकरण को आफ लाइन और समाधारण बाजार के शुरू होने के पहले दुहराया जाता है।

सूचकांक मूल्य के गणना के लिए दुहराए आधार पूंजीकरण या संशोधित भाजक का इस्तेमाल किया जाता है।

कॉरपोरेट कार्य के प्रकार

क्रम संख्या

कॉरपोरेट कार्य के प्रकार

आधार पूंजीकरण /

भाजक समायोजन

5 / 6  में आधार पूंजीकरण/भाजक

1

अधिकार

हां

5

2

बोनस

नहीं

1

3

शेयर विभाजन

नहीं

1

4

ऋण रूपान्तरण

हां

5

5

वारंट रूपान्तरण

हां

5

6

सार्वजिनक निर्गम -घरेलू

हां

5

7

सार्वजिनक निर्गम -विदेशी GDR/ADR

हां

5

8

शेयरों की जब्ती

हां

6

9

कॉरपोरेट पुर्नगठन

हां

5 / 6

10

विलय और एकीकरण

हां

5 / 6

कंपनी कार्योंं के अलावा सूचकांक पर असर करने वाले अन्य कारक :–

क्रम

कॉरपोरेट कार्य के प्रकार

आधार पूंजीकरण/भाजक समायोजन

5 / 6  में आधार पूंजीकरण/भाजक

1

सूचकांक के कम्पनी में जोड़ और घटाव

हां

5 / 6

इक्विटी अधिकार निर्गम

अधिकारों की पेशकश:
एक कंपनी अधिकारों की पेशकश सिर्फ मौजूदा शेयरधारकों के लिए लेकर आती है। कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को ज्यादा कोष के लिए आमंत्रित करती है। ज्यादा इक्विटी के लिए प्रति शेयरों की कीमत सदस्यता मूल्य कहलाती है जो कि कंपनी के विवके पर निर्भर होता है। जिसके परिणामस्वरूप पूंजी का आगमन बढ़ता है और कंपनी के शेयर पूंजी में बढ़ोत्तरी होती है। अधिकारों की पेशकश से कंपनी का बाजार में पूंजी बढ़ता है जिसे कि सूचकांक में बराबर करने की जरूरत होती है।

प्रक्रिया :
पहला चरण: अधिकारों की पेशकश के अनुपात को जानना जैसे कि कंपनी के कितने शेयरों के बदले एक अधिकार शेयर प्राप्त होगा।
दूसरा चरण: कंपनी द्वारा जारी अधिकारों की पेशकश का प्रस्तावित मूल्य।
तीसरा चरण अधिकारों की पेशकश से कंपनी के बाजार में अतिरिक्त पूंजी की गणना। (अतिरिक्त राइट्स शेयर ’ राइट्स मूल्य)
चौथा चरण: सूचकांक में मौजूदा बाजार पूंजी में इसका जोड़।
पांचवा चरण सूचकांक में अधिकारों की पेशकश के बाद नई आधार पूंजी की गणना नीचे दिए गये फॉर्मूले के आधार पर करें।

 

आधार पूंजी में बदलाव की गणना

                                   नया बाजार पूंजी
दुहराया आधार पूंजी = ------------------ * 1000
                                    सूचकांक मूल्य

नया बाजार पूंजी = ( N * P ) + सूचकांक में पहले का बाजार पूंजी

N = अधिकारों की पेशकश के जरिए प्रस्तावित नये शेयरों की संख्या
P = प्रस्तावित मूल्य

बदलाव के पहले सूचकांक में पुराना बाजार पूंजी ही बंद होते वक्त की बाजार पूंजी होगी।

एक्सजेंच द्वारा निर्धारित तारीख पर ही बदलाव होगा। सभी बदलाव साधारण बाजार के शुरू होने के पहले ही किया जाएगा। बाजार के खुलने के बाद सभी सूचकांक मूल्य का दुहराए हुए आधार पूंजी के आधार पर गणना किया जाएगा।  

ये बदलाव इस आधार पर किया जाएगा कि अधिकारों का पेशकश पूरी तरह से सब्सक्राइब हो चुका है। अगर किसी स्थिति में राइट्स इश्यू पूरी तरह से सब्सक्राइब नहीं हुआ है तो कंपनी के शेयर पूंजी को प्राप्त सदस्यता के आधार पर बराबर कर दिया जाएगा। ये कंपनी द्वारा एक्सचेंज को सूचित करने के बाद ही होगा।

मान लिया जाए कि ए सी सी ने 1:4 के अनुपात में अधिकारों की पेशकश (कंपनी के 4 शेयरों के बदले 1 राइट्स शेयर) प्रस्तावित मूल्य 55 रुपये पर की।
 
Ex date 19 may 2009

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का 18 मई 2009 को बाजार पूंजी

Rs. 2,553.6 bn

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का 18 मई 2009 को सूचकांक मूल्य

1,160.15

एसीसी के इक्वीटी शेयर की मौजूदा संख्या

137,012,320

18 मई 2009 को एसीसी का मूल्य (137,012,320 * 181.45)

Rs. 181.45

18 मई 2009 को एसीसी का बाजार पूंजी (137,012,320 * 181.45)

Rs. 24.9 bn

एसीसी के राइट्स की वजह से अतिरिक्त शेयर ( 137,012,320 / 4)

34,253,080

अधिकार मूल्य

Rs. 55

जुड़े हुए शेयर की बाजार पूंजी ( 34,253,080 * 55)

Rs. 1.9 bn

एसीसी की नयी बाजार पूंजी ( 24.9 vjc + 1.9 vjc)

Rs. 26.8 bn

सैद्धांन्तिक मूल्य ( 26.8 vjc / 171,265,400)

Rs. 156.16

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का नया बाजार पूंजी (2553.6bn+ 1.9bn)

Rs. 2,555.5 bn

सूचकांक का पुराना आधार पूंजी ; पुराना बाजार पूंजी

Rs. 2,201 bn

सूचकांक का नया आधार पूंजी ; नया बाजार पूंजी

Rs. 2,202.7 bn

बोनस इश्यू और शेयर विभाजन

बोनस इश्यू : मौजूदा शेयर धारकों को जो शेयर दिया जाता है वो बोनस इश्यू कहलाता है और पूंजी के भंडारण का परिणामस्वरूप होता है। इससे कंपनी के बकाया शेयरों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है। सूचकांक में इस बोनस को समान करने की कोई जरूरत नहीं होती है क्योंकी जो भी शेयरों की संख्या बढ़ती है वो समान अनुपात में शेयर के मूल्य में गिरावट से समान हो जाती है इसिलए बाजार के पूंजी में इसका कोई सैद्धांतिक असर नहीं पड़ता है।

प्रक्रिया :
पहला चरण :

बोनस शेयर के अनुपात को जानना जैसे कि कंपनी के कितने शेयरों के बदले एक बोनस शेयर प्राप्त होगा।

दूसरा चरण :

बोनस शेयर की बदौलत कंपनी के बकाया शेयरों की संख्या में इजाफा होता है।

शेयर विभाजन : स्टॉक के अंकित मूल्य में परिवर्तन ही शेयर विभाजन है। शेयर विभाजन में प्रति शेयर का मूल्य घटता है और उसी अनुपात में शेयरों की संख्या में इजाफा होता है इसिलए कंपनी के शेयर कैपिटल में कोई बदलाव नहीं होता है।

ये प्रक्रिया बोनस इश्यू के ही समान है। इसमें कोई भी बदलाव एनएसई द्वारा निर्धारित तारीख पर कंपनी के आधारित अनुपात में ही होता है। इसमें सभी बदलाव बाजार के शुरू होने के पहले ही किया जाता है।

मान लिया जाए कि एनआईआईटी ने 1:2 के अनुपात में बोनस इश्यू(प्रत्येक 2 शेयरों के बदले 1 बोनस शेयर) 3 मार्च 2009 की पहले की तारीख पर जारी हुआ।

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का 02 मार्च 2009 को बाजार पूंजी

Rs. 2,227 bn

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का 02 मार्च 2009 को सूचकांक मूल्य

1,015.80

एनआईआईटी के मौजूदा इक्विटी शेयरों की संख्या

25,768,086

02 मार्चर्य 2009 को एनआईआईटी की कीमत

Rs. 2,862.00

02 मार्चर्य 1999 को एनआईआईटी का बाजार पूंजी (25,786,086 * 2,862)

Rs. 73.75 bn

बोनस के तौर पर जुड़े हुए शेयरों की संख्या (25,786,086 / 2)

12,884,043

बोनस के बाद एनआईआईटी के कुल शेयरों की संख्या (25,768,086 +,12,884,043)

38,652,129

सैद्धांतिक तौर पर बोनस पूर्व एनआईआईटी की कीमत ( 2,862 * 2/3)

Rs. 1,908.00

एनआईआईटी का नया बाजार पूंजी ( 38652129 * 1,908 )

Rs. 73.75 bn

क्योंकि एनआईआईटी बाजार पूंजी में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है इसलिए आधार कैपिटल में भी किसी बदलाव की जरूरत नहीं होगी।

ऋण रूपान्तरण, वारंट रूपान्तरण/ पब्लिक इश्यू (घरेलू/विदेशी), निजी नियोजन, जब्ती

ऋण रूपान्तरण: जब एक कंपनी पूर्ण या आंशिक रूप से बदलाव वाले ऋण पत्र को जारी करता है तब ये ऋण पत्र निर्धारित समय पर पूर्ण या अंशिक रूप से इक्विटी शेयर में बदल जाता है।

वारंट रूपान्तरण: वारंट रखने वालों के पास ये विकल्प होता है कि एक निश्चित समय सीमा के अन्दर कंपनी द्वारा प्रस्तावित मूल्य पर इसे इक्विटी शेयर में सब्सक्राइब कराया जा सकता है। वारंट डेब्ट इश्यू के साथ साधरणत: एक उपहार होता है और धारकों के पास ये अधिकार होता है कि वे इसे इक्विटी शेयर के रूप में सब्सक्राइब करा सकते हैं।

निजी नियोजन: जब एक कंपनी अपने शेयर को एक या ज्यादा निवेशकों को बेचती है तो निजी नियोजन एसी का परिणाम होता है। ये सभी कॉरपोरेट प्रक्रिया जैसे कि ऋण रूपान्तरण, वारंट रूपान्तरण, पब्लिक इश्यू, तरजीही आवंटन, निजी नियोजन कंपनी के शेयर कैपिटल को बढ़ाते हैं।

प्रक्रिया :
 
पहला चरण :

ऋण रूपान्तरण या वारंट रूपान्तरण के परिणामस्वरूप एनएसई में लिस्टिंग के लिए आये हुए शेयरों की संख्या को जानना।

दूसरा चरण : सुधार के पहले शेयर का बाजार मूल्य जानना।
तीसरा चरण

कॉरपोरेट प्रक्रिया की वजह से मौजूदा बाजार पूंजी की गणना।

चौथा चरण :

नीचे दिए गये फॉर्मूले के आधार पर नये आधार पूंजी की गणना।

नोट : कंपनी के शेयर कैपिटल के आकार में बदलाव होता है, एनएसई में अतिरिक्त शेयरों के सूचीकरण से। ये साधारण बाजार के शुरू होने के पहले होता है। बाजार के खुलने के बाद सभी सूचकांक मूल्य का दुहराए हुए आधार पूंजी के आधार पर गणना होती है।

संशोधित आधार पूंजी की गणना

                                   नया बाजार पूंजी
दुहराया आधार पूंजी = ------------------- * 1000
                                      सूचकांक मूल्य

नया बाजार पूंजी = ( N * P ) + पुराना बाजार पूंजी
N = प्रस्तावित नये शेयरों की संख्या
P = पिछला अन्तिम मूल्य

बदलाव के पहले सूचकांक में पुराना बाजार पूंजी ही बंद होते वक्त की बाजार पूंजी होगी।

23 सितंबर को रिलांयस पेट्रोलियम के 236,462,800 शेयरों का ऋण पत्र परिवर्तन की घटना को मद्देनजर रखते हुए।

 

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का 22 सितम्बर 2009 को बाजार पूंजी

Rs. 1,852.2 bn

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का 22 सितम्बर 2009 को अन्तिम सूचकांक मूल्य

897.25

परिवर्तन के लिए कुल प्रस्तावित शेयरों की संख्या

236,462,800

रिलायन्स पेट्रोलियम का 22 सितम्बर 2009 को शेयर मूल्य

Rs. 17.80

रिलायन्स पेट्रोलियम का मौजूदा इक्विटी शेयर

903,156,100

परिवर्तन के बाद रिलायन्स पेट्रोलियम का कुल O/S इक्विटी शेयर (903,156,100 + 236,462,800 )

1,139,618,900

रिलायन्स पेट्रोलियम का अतिरिक्त पूंजी बाजार (236,462,800 * 17.80 )

Rs. 4.2 bn

रिलायन्स पेट्रोलियम की नई बाजार पूंजी (1,139,618,900 * 17.80 )

Rs. 20.3 bn

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का नया बाजार पूंजी (1,852.2 + 4.2)

Rs. 1,856.4 bn

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का पुराना आधार पूंजी (1,852.2 * 1,000 / 897.25)

Rs. 2,064 bn

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का नया आधार पूंजी (1,856.4 bn * 1,000 / 897.25 )

Rs. 2,069 bn

शेयरो की जब्ती :
पैसे या किसी अन्य कारण से शेयरधारकों से अगर कोई चूक होती है तो कंपनी के पास इनके शेयरों को जब्त करने का अधिकार होता है। अगर शेयर जब्त होते हैं तो कंपनी के कुल बकाया शेयरों की संख्या में कमी आती है जिसकी वजह से कंपनी के बाजार पूंजी मे गिरावट दर्ज होती है। शेयर को लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब एक्सचेंज को ये जानकारी प्राप्त हो जाती है और आधार पूंजी में बदलाव किया जाता है।

विलय और अधिग्रहण:
इसमें दो या इससे ज्यादा कंपिनयों का विलय होता है। इसमें शेयरधारकों को अधिग्रिहत कंपनी के शेयर प्राप्त होते हैं। विलय कंपनी एक गैर मौजूदा इकाई बन जाता है। हमारे पास निम्नलिखित केस हैं।

1. सूचीबद्ध कपनी का सूचकांक कंपनी के साथ विलय :

1. ऐसी स्थिति में स्टॉक एक्सचेंज अधिग्रहण करने वाली कम्पनी सूचकांक कंपनी और अधिग्रिहत कंपनी कोई भी गैर सूचकांक सूचीबद्ध कंपनी होती है।

प्रक्रिया
पहला चरण

विलय के अनुपात को जानना जैसे कि विलय वाली कंपनी के कितने शेयर अधिग्रिहत कंपनी के एक शेयर के बदले जारी किये जएंगे।

दूसरा चरण -

विलय के अन्दर अधिग्रिहत कंपनी के अतिरिक्त जारी शेयरों की गणना

तीसरा चरण - नये शेयर को जारी करने की वजह से मौजूदा बढ़े हुए बाजार पूंजी की गणना
चौथा चरण -

ऋण परिवर्तन की तरह ही नये आधार पूंजी की गणना करें।

अधिग्रिहत कंपनी के शेयर पूंजी और सूचकांक में आधार पूंजी के सामंजस्य के लिए इकाई विलय को गैर सूचीबद्ध किया जाता है। बाजार खुलने के बाद सभी सूचकांक मूल्य को दुहराए हुए आधार पूंजी के आधार पर गणना करें।

2. गैर सूचीबद्ध कंपनी का सूचकांक कंपनी के साथ विलय :
इस स्थिति में सूचकांक में शामिल एक कंपनी किसी वैसे कंपनी को अधिग्रिहत करती है जो सूचकांक में सूचीबद्ध नहीं है।

प्रक्रिया : अधिग्रिहत कंपनी के अतिरिक्त शेयर विलय इकाई के शेयरधारकों को जारी किये जाएंगे। ये अतिरिक्त शेयर अधिग्रिहत कंपनी के मौजूदा शेयर कैपिटल में इन शेयरों के सूचीबद्ध होने की तारीख से जोड़े जाऐंगे।

पहला चरण

विलय के अन्दर अधिग्रिहत कंपनी के अतिरिक्त जारी शेयरों की गणना

दूसरा चरण

नये शेयर को जारी करने की वजह से मौजूदा बढ़े हुए बाजार पूंजी की गणना

तीसरा चरण

ऋण परिवर्तन की तरह ही नये आधार पूंजी की गणना करें।

3. दो सूचकांक कंपनी का विलय :
इस स्थिति में दोनों अधिग्रिहत कंपनी और विलय कंपनी सूचकांक कंपनी होती है। दूसरे शब्दों में दो सूचकांक कंपनी विलय होकर एक कंपनी हो गयी इसिलए सूचकांक में एक और कंपनी जुड़ जाएगी।

प्रक्रिया :
पहला चरण

विलय के अनुपात को जानना, विलय वाली कंपनी के कितने शेयर अधिग्रिहत कंपनी के एक शेयर के बदले जारी किये जाऐंगे।

दूसरा चरण विलय के परिणामस्वरूप अधिग्रिहत कंपनी बाजार पूंजी की बढ़ोत्तरी की गणना
तीसरा चरण

नीचे दिए गये फॉर्मूले के अनुसार विलय के परिणामस्वरूप सूचकांक में बाजार पूंजी के शुद्ध जोड़ और घटाव की गणना

चौथा चरण

नीचे दिए गये फॉर्मूले के मुताबिक सूचकांक में नये आधार बाजार पूंजी की गणना

दो कंपिनयों के इस विलय को कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद एक जरूरी कदम होता है विलय हुई कंपनी की जगह दूसरे को ढ़ूढना। विलय के बाद ये गैर मौजूदा इकाई होती हैं इसिलए इसे सूचकांक से हटा दिया जाता है। नयी कंपनी का चुनाव सूचकांक के प्रतिस्थापन के निर्धारित मानदंड के अनुसार ही होगा। सूचकांक में शामिल होने वाली कंपनी को प्रेस के जरिए 5 सप्ताह पहले ही सूचना देनी होगी। सभी बदलाव साधारण बाजार के शुरू होने के पहले ही होना चाहिए।

संशोधित आधार पूंजी की गणना

                                     नया बाजार पूंजी
दुहराया आधार पूंजी = -------------------- * 1000
                                       सूचकांक मूल्य

नया बाजार पूंजी = ( NAD ) + सूचकांक का पुराना बाजार पूंजी

NAD = बाजार पूंजी का शुद्ध जोड़ और घटाव

NAD = विलय के बाद कंपनी के बाजार पूंजी में बढ़ोत्तरी
          – विलय कंपनी का बाजार पूंजी

बदलाव के पहले सूचकांक में पुराना बाजार पूंजी ही बंद होते वक्त की बाजार पूंजी होगी।

NAD भी नाकारात्मक हो सकता है अगर नये शेयर के बाजार पूंजी विलय वाली कंपनी के बाजार पूंजी से कम मूल्य का हो।

इसके बाद एक दूसरे समन्वय की आवश्यकता होती है जिसमें नयी कम्पनी को सूचकांक में शामिल करना होता है क्योंकि विलय वाली कंपनी एक गैर मौजूदा इकाई हो जाती है। इस समन्वय को सूचकांक में जोड़ और घटाव की श्रेणी में रखा जाता है।

जनवरी 20, 2009 को एचएलएल और पॉन्डस के विलय कि स्थिति पर विचार करें तो विलय का अनुपात पॉन्डस के 4 शेयर के बदले एचएलएल का 3 शेयर था।

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का 19 जनवरी 2009 को बाजार पूंजी

Rs. 1,990 bn

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का 19 जनवरी 2009 को आखिरी सूचकांक मूल्य

924.10

19 जनवरी 2009 को पोन्डस का बाजार पूंजी

Rs. 37.1 bn

एचएलएल का मौजूदा इक्विटी शेयर

199,167,287

19 जनवरी 2009 को एचएलएल का मूल्य

Rs. 1,704.20

19 जनवरी 2009 को एचएलएल का बाजार पूंजी (199,167,287 * 1,704.20 )

Rs. 339.4 bn

पेन्डस के साथ एचएलएल के विलय पर अतिरिक्त O/S इक्विटी कैप

20,402,209

पेन्डस के साथ एचएलएल के विलय पर अतिरिक्त बाजार पूंजी (20,402,209 * 1,704.20 )

Rs. 34.8 bn

एचएलएल का नया बाजार पूंजी ( 339.4 + 34.8 )

Rs. 374.2 bn

सूचकांक में विलय के खाते से बाजार पूंजी का शुद्ध जोड़ या घटाव (Rs. 34.8 bn – Rs. 37.1 bn )

(Rs. 2.3 bn )

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का नया बाजार पूंजी ( Rs.1,990 bn + ( Rs. 2.3 bn))

Rs. 1,987.7 bn

एस एण्ड पी सीएनएक्स का पुराना आधार पूंजी

Rs. 2,153.5 bn

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का नया आधार पूंजी (1,987.7 * 1000 / 924.10 )

Rs. 2,151 bn

 4. सूचकांक वाली कंपनी का गैर सूचकांक कंपनी में विलय :
इस स्थिति में सूचकांक और गैर सूचकांक कंपनी का विलय होता है। यंहा पर अधिग्रहण करने वाली कंपनी सूचकांक के बाहर होती है और विलय वाली कंपनी सूचकांक के अन्दर। इसके फलस्वरूप विलय के बाद सूचकांक कंपनी गैर मौजूदा इकाई हो जाती है। ऐसी स्थिति में विलय वाली इकाई को हटाने और नई कंपनी के प्रतिस्थापन के लिए समन्वय करना होता है।

प्रक्रिया :
सूचकांक कंपनी के प्रतिस्थापन के लिए निर्धारित मानदंड के अनुरूप ही चुनाव होगा। सूचकांक में शामिल होने वाली कंपनी और विलय ईकाई के हटने की जानकारी प्रेस के जरिए 5 सप्ताह पहले ही देनी होगी। सभी बदलाव साधारण बाजार के शुरू होने के पहले ही होना चाहिए।


सूचकांक सेट से जुड़ाव या विघटन
सूचकांक का मिश्रण कई कारणों से समय समय पर बदलता रहता है जैसे की विलय, अधिग्रहण, दिवालिया, पुनर्गठन, प्रतिनिधित्व का अभाव या फिर सूचकांक के चयन प्रक्रिया को पूरा नहीं करना आदि।

सभी सूचकांको में एक प्रतिस्थापन कड़ी होती है वैसी कंपिनयों कि जो सूचकांक की सदस्यता के सभी नियमों का पूरा करते हों। सूचकांक में कंपिनयों में होने वाले किसी भी बदलाव के लिए इसी कड़ी का इस्तेमाल किया जाता है।

प्रक्रिया :
 
चरण 1 : निपटारा करने से पहले सूचकांक से हटाई जा रही कंपिनयों के बाज़ार पूंजीकरण की बंद हुई बाज़ार राशि के साथ गणना करें।
चरण 2 : उसी तरह सूचकांक में शामिल की जा रही कंपिनयांे के पूंजी बाज़ार की गणना करें।
चरण 3 : सूचकांक के कुल पूंजी बाज़ार की शुद्ध बदलाव की गणना के लिए हटाई गई कंपनियों के पूंजी बाज़ार को जोड़ी गई कंपनियों के पूंजी बाज़ार से घटाएं।
चरण 4 : सूचकांक की नई आधार पूंजी की गणना करें।

सूचकांक में जोड़ी जाने वाली और उससे हटाई जाने वाली कंपिनयों को प्रेस रिलीज़ द्वारा 5 हफ्ते पहले ही सूचित कर दिया जाता है। सभी बदलाव बुधवार को सामान्य बाज़ार की शुरूआत से पहले कर दिए जाते हैं। बाज़ार के खुलने के बाद पिछले सभी सूचकांक मूल्य, संशोधित आधार पूंजीकरण और संशोधित घटकों को ध्यान में रखकर गिना जाता है।

संशोधित आधार पूंजी की गणना

                                    नया पूंजी बाज़ार
संशोधित आधार पूंजी = ------------------- * 1000
                                       सूचकांक मूल्य

नया पूंजी बाज़ार = शुद्ध बदलाव + सूचकांक का पुराना पूंजी बाज़ार

शुद्ध बदलाव = सूचकांक में जोड़ी गई कंपिनयों की बाज़ार पूंजी
                   -सूचकांक से हटाई गई कंपिनयों की बाज़ार पूंजी

निपटारा करने से पहले पुराना पूंजी बाज़ार सूचकांक का समापन पूंजी बाज़ार रहता है।

7 अक्टूबर 1998 के वृतांत को ध्यान में रखे/समझे/गौर करें जब सात ज़मानतें/प्रतिभूति जोड़ी गई और एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी से हटा दी गईं।

जोड़ी गई कंपिनयां

6 अक्टूबर 1998 को शीर्ष बाज़ार

1. इंफोसिस टेक्नोलोजिज़ लिमिटेड

36.2 अरब रुपये

2. एनआईआईटी लिमिटेड

33.4 अरब रुपये

3. बैंक आफ़ इंडिया

15.8 अरब रुपये

4. िस्मथक्लाइन बीकम कंज्यूमर हेल्थकेयर

21.6 अरब रुपये

5. हीरो होन्डा मोटर्स लिमिटेड

23.5 अरब रुपये

6.प्रोक्टर एंड गेम्बल लिमिटेड

16 अरब रुपये

7.सिपला लिमिटेड

15.9 अरब रुपये

कुल

162.4 अरब रुपये

 

हटाई गई कंपिनयां

6 अक्टूबर 1998 को शीर्ष बाज़ार

1. बीपीसीएल

33.8 अरब रुपये

2.अशोक लेलैंड लिमिटेड

2.7 अरब रुपये

3.इंडो गल्फ़ फ़िटर्ला इज़र्स

5.8 अरब रुपये

4.आंध्रा वैली पावर सप्लाई लिमिटेड

4.6 अरब रुपये

5.थरमैक्स लिमिटेड

3.8 अरब रुपये

6.एमआरपीएल

5.4 अरब रुपये

7.पौंड्स इंिडया लिमिटेड

35.3 अरब रुपये

कुल

91.4 अरब रुपये

 

अक्टूबर 6, 1998 को एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का पूंजी बाज़ार

1]750 अरब रुपये

अक्टूबर 6, 1998 को एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का समापन सूचकांक मूल्य

845.75

घटकों को जोड़ने/हटाने हेतु एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी से पूंजी बाज़ार का शुद्ध जोड़/विलोपन-162.4 अरब रुपये – 91.4 अरब रुपये

71 अरब रुपये

जोड़ने/हटाने हेतु एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का नया पूंजी बाज़ार - 1750 अरब रुपये + 71 अरब रुपये

1]821 अरब रुपये

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का आधार पूंजी बाज़ार

2]069 अरब रुपये

एस एण्ड पी सीएनएक्स निफ्टी का नया आधार पूंजी बाज़ार -2069 अरब * 1000@845-75

2]446 अरब रुपये

लाभांश घोषणा
संयुक्त/सामूहिक/संगिठत कार्य/कार्रवाइयां/प्रक्रियाएं जैसे लाभांश घोषणा को सामान्य मूल्य सूचकांक में किसी तरह के निपटारे की ज़रूरत नहीं होती है। एक अलग कुल प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक ; Total Returns Index - (TR)TR की गणना की जाती है, जो सूचकांक निवेश सूची पर लाभांश को मिलाकर प्रतिलाभ/प्रतिफल दर्शाता है। कुल प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक ; Total Returns Index - TR TR की गणना हमेशा वर्तमान पूंजीकरण सूचकांक पर ही की जाती है।

प्रक्रिया :
 
चरण 1 : कंपनी द्वारा घोिषत किए गए प्रत्येक शेयर का लाभांश पता करें।
चरण 2 : कंपनी के बकाया शेयरों के नंबर पता करें।
चरण 3 : कंपनी द्वारा देय लाभांश की कुल रकम की गणना करें। यह प्रत्येक शेयर के लाभांश का फल/परिणाम/उत्पादन है और कंपनी के बकाया शेयर हैं।
चरण 4 : नीचे दिए गए फॉर्मूले के अनुसार दिन के सूचकांक लाभांश की गणना करें।
चरण 5 : नीचे दिए गए फॉर्मूले के अनुसार टीआर सूचकांक की गणना करें।

कुल प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक Total Returns Index में बदलाव केवल लाभांश के मामले में ही किया जाएगा। लाभांश मामलों का जवाब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज द्वारा निर्धारित पुरानी तारीख पर दिया जाएगा।

कुल प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक Total Returns Index की गणना

कुल प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक Total Returns Index

= पुराना कुल प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक मूल्य*एमसी सूचकांक मूल्य + दिन का सूचकांक लाभांश
                                   --------------------------------------------------
                                           पुराना एमसी सूचकांक मूल्य

                                             सूचकांक में शेयरों का कुल लाभांश
दिन का सूचकांक लाभांश = -------------------------------------------
                                                   एमसी सूचकांक का भाजक सूचकांक

एमसी सूचकांक = पूंजी बाज़ार आधारित सूचकांक जिसके लिए कुल प्रतिगम/प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक की गणना की जाती है।

सूचकांक में कुल शेयरों का लाभांश = प्रति शेयर लाभांश * बकाया शेयर

8 मार्च, 2000 को निफ़्टी इंडेक्स में शामिल की गई दो कंपिनयों की लाभांश घोषणा के मामले पर विचार करें।

  1. हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड ने 17 रुपये प्रति शेयर के अंतिम लाभांश की घोषणा की।
  2. ग्लैक्सो इंडिया लिमिटेड ने 6 रुपये प्रति शेयर के लाभांश की घोषणा की। 8 मार्च, 2000 के लिए कुल प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक की गणना
निफ्टी पूंजी बाज़ार पर आधारित सूचकांक है जिस पर कुल प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक की गणना की जाती है।
 

8 मार्च, 2000 को निफ़्टी इंडेक्स का समािप्त मूल्य

1666.35

7 मार्च, 2000 को निफ़्टी इंडेक्स का समािप्त मूल्य

1702.75

7 मार्च, 2000 को कुल प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक का समािप्त मूल्य

1806.31

निफ्टी सूचकांक भाजक

2,427,483,702

एचएलएल के बकाया इक्विटी शेयर

219,569,495

एचएलएल द्वारा देय लाभांश ; 219,569,495* 17

3.73 अरब रुपये

ग्लैक्सो के बकाया इक्विटी शेयर

59,775,000

ग्लैक्सो द्वारा देय लाभांश 59,775,000* 6

359 लाख रुपये

सूचकांक लाभांश ; 3.73 अरब रुपये + 359 लाख रुपये / 2,427,483,702

1.68542

नया कुल प्रतिलाभ/प्रतिफल सूचकांक मूल्य 1806-31 * (1666-35+1-68542))
                                                   ---------------------------

                                                               1702.75

1769.48

सामूहिक/संयुक्त कार्यवाइयों के लिए सूचकांक निधि का निपटारा

आधिकारिक मुद्दे
आधिकारिक घटनाओं के कारण सूचकांक निधि को उसकी निवेश सूची के भार को निपटाने की ज़रूरत पड़ती है।

आधिकारिक घटनाओं के कारण सूचकांक निधि को उसकी निवेश सूची के भार को निपटाने की ज़रूरत पड़ती है।

तरलता पर हर निधि अपनी निवेश सूची का कुछ हिस्सा नकद रूप में संभाल कर रखती है। इस तरह से उसे आधिकारिक मुद्दों में स्वीकार किया जा सकता है।

निधि अधिकार के मुद्दा को समाप्त होने दे सकती है और पुरानी तारीख पर निवेश सूची को दुबारा संतुलित कर सकती है।

लाभ मुद्दा
लाभ मुद्दे में पूंजी बाज़ार के अंतिर्निहत सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं होता है, इसिलए इसे आधार पूंजी के लिए किसी निपटारे की ज़रूरत नहीं होती है। चूंकि सूचकांक के संदर्भ में आधार पूंजी में कोई समझौता नहीं किया जाता है, सूचकांक निधि में किसी समझौते/निपटारे की ज़रूरत नहीं होती है।

ऋण परिवर्तन/वारंट परिवर्तन/सार्वजिनक मुद्दे/गैर सरकारी स्थापन
ऋण/वारंट/सार्वजिनक मुद्दे/गैर सरकारी स्थापन परिवर्तन सूचकांक में सुरक्षा वेटेज में वृद्धि करते हैं। इस तरह से, सूचकांक निधि को उसकी निवेश सूची में उस सुरक्षा वेटेज को बढ़ाना पडे़गा। इसके लिए मुक्त बाज़ार से सूचकांक के साथ हुई समझौते वाली तारीख को अतिरिक्त शेयर खरीदने पड़ेंगे। इस खरीद के लिए स्टॉक के मौजूदा अंकों में से प्रतिभूतियां बेचकर या फिर कैश बफ़र से नकद अर्जित किया जा सकता है।

विलयन और अधिग्रहण
विलयन और अधिग्रहण की विभिन्न्न संभावनाएं इस प्रकार से हैं :

1)

किसी सूचित कंपनी का सूचकांक कंपनी से विलयन : अधिग्रहण करने वाली कंपनी के शेयर विलय होने वाली संस्था के शेयरहोलडर्स को जारी कर दिए जाएंगे, अधिग्रहण करने वाली कंपनी का पूंजी बाज़ार बढ़कर सूचकांक में उसके भार को बढ़ा देगा। इस मामले में किया जाने वाला एकमात्र समझौता अधिग्रहण करने वाली कंपनी की भार को बढ़ा देगा। इसिलए सूचकांक में समझौता होने के बाद निधि वेटेजेज़ के दुबारा संतुलन के लिए एक्स डेट पर शेयर्स खरीदे जाएंगे। इस खरीद के लिए स्टॉक के मौजूदा अंकों में से प्रतिभूतियां बेचकर या फिर कैश बफ़र से नकद अर्जित किया जा सकता है।
 

2)

किसी गैर–सूचित कंपनी का सूचकांक कंपनी से विलयन : ऊपर के मामले की ही तरह इसमें भी समझौता एक समान रहता है। अधिग्रहण करने वाली कंपनी के शेयरों को विस्तृत तौर पर खरीदा जाता है। बकाया शेयरों की संख्या बढ़ने से सूचकांक में भार बढ़ जाता है।
 

3)
दो सूचकांक कंपिनयों का विलयन : इस मामले में दो समझौते होते हैं
क)

अधिग्रहण करने वाली कंपनी का पूंजी बाज़ार बढ़ जाएगा : यह संभवत: िचंता का मुद्दा नहीं होता है क्योंकि निधि स्वत: ही अधिग्रहण करने वाली कंपनी में विलय होने वाली कंपनी की संपतियों के लिए अपना हिस्सा पा लेगी।

ख)

सूचकांक में एक नई कंपनी को शामिल किया जाएगा : सूचकांक में प्रवेश करने वाले नए स्टॉक को खरीदने के लिए पर्याप्त नकद की ज़रूरत पड़ेगी। इसके लिए सूचकांक में सभी स्टॉक्स का एक भाग बेचकर निधि को दुबारा से संतुलित किया जाएगा।
 

4)

एक सूचकांक कंपनी का सूचकांक से बाहर वाली कंपनी से विलय : इस मामले में निवेश सूची में समझौते के तहत विलय होने वाली सूचकांक कंपनी के सभी शेयर बेचे जाते हैं और नई सूचकांक कंपनी के शेयर्स उसके वेटेज के अनुसार खरीदे जाते हैं। निधि में से उसकी मौजूदा निवेश सूची का एक हिस्सा नई कंपनी के शेयर खरीदने हेतु पर्याप्त नकद अर्जित करने के लिए बेचा भी जा सकता है। ऐसा दोनों कंपिनयों के बीच शीर्ष बाज़ार की भिन्नता को लेकर हो सकता है।

सूचकांक में कंपिनयों का जुड़ना और हटना : निधि को सूचकांक में से हटाई जा रही कंपनी के शेयरों को बेचना पड़ता है। यदि आने वाली कंपनी का पूंजी बाज़ार सेवामुक्त कंपनी से बड़ा होता है तो सूचकांक में दूसरी सभी जमानतों का एक हिस्सा आनेवाले स्टॉक की खरीद के लिए बेचना पड़ेगा।

नकद लाभांश :
यदि नकद लाभांश सीधे निवेशकों तक ना पहुंचे तो उसके लिए फिर तत्पर पुनिर्नवेश की ज़रूरत पड़ती है। नकद लाभांशों को अल्पाविध निवेश निधि के लिए जमा करना इसका एक सरल विकल्प है। एक निश्चित अविध के अंत में निधि प्रबंधक पूंजी को स्टॉक बाज़ार में स्थानांतिरत कर सकता है।

सूचकांक निधि के प्रबंधन में आने वाली व्यावहारिक समस्याएं
हालांकि सूचकांक निधि निष्क्रिय प्रबंध निधि हैं, इसके अगले भाग में सूचकांक निधि को चलाने में कई तरह की व्यावहारिक समस्याएं हैं। इसका असर त्रुटि खोज यानि ट्रैकिंग एरर पर पड़ता है।

 
ये इस प्रकार से हैं:–
1.

सूचकांक निधि हर बार पूरी तरह से निवेश नहीं किया जाता है। इसको एक पर्याप्त कैश बफ़र निर्धारित करने की ज़रूरत होती है जिससे कि तरलता की ज़रूरतों को पूरा किया जा सके। परिणामस्वरूप तरलता प्रयोजन के लिए ग्रहण की गई उस धनराशि पर प्रतिफल सूचकांक पर होने वाले प्रतिफल से भिन्न होगा।

2.

निधि नए मुद्दों को उस मूल्य पर प्राप्त कर पाने में संभवत : सक्षम ना हो, जिस पर उन्हें सूचकांक में शामिल किया गया था।

3.

निश्चित प्रतिभूतियों के नो डिलीवरी अविध में होने से सूचकांक निधि में उसकी निवेश सूची के निपटारे में समस्या हो सकती है।

4.

सूचकांक के निपटारे के लिए सामूहिक प्रक्रियाएं जैसे आधिकारिक मुद्दे, लाभ मुद्दे, नकद लाभांश एक्स डेट पर की जाती हैं। लेकिन निधि को वास्तिवक शेयर्स या लाभांश रकम एक निश्चित अविध के बाद ही मिलती है। तब तक, इसका असर त्रुटि खोज यानि ट्रैकिंग एरर पर पड़ेगा।

तरलता का निर्वाह और कैश फ्लो
किसी सूचकांक निधि के लिए हर बार स्टॉक में 100 प्रतिशत निवेश करना असंभव है। निवेश सूची का कुछ हिस्सा प्रतिदान प्रयोजनों के लिए नकद में अवश्य रखना चाहिए। सूचकांक निधि में कैश फ़्लो को प्रयोग करने के लिए कई तकनीकें इस्तेमाल की जा सकती हैं। सूचकांक निधि में कैश फ़्लो को निवेश करने के लिए अलग–अलग तरीके हैं।

1.

सूचकांक भावी सौदों के इस्तेमाल पर
सूचकांक निधि प्रबंधक भावी सौदों का इस्तेमाल कर अपनी निधि का पूरा निवेश कर सकता है। सूचकांक भावी सौदे संविदात्मक अनुबंध होते हैं जिनके ज़िरए भविष्य में एक निश्चित तिथि पर सूचकांक को आज की तय कीमत पर खरीदा या बेचा जाता है। भावी अनुबंधों को आवंटित संपति सूचकांक की तरह समान प्रतिफल दर प्राप्त करेंगी और भावी बाज़ार के अंदर और बाहर की प्रविष्टि काफ़ी निम्न कीमत पर की जा सकती है।

लाभांश आय से उत्पन्न नकद और दूसरे इनफ़्लो यानि अंतर्वाह का इस्तेमाल भावी अनुबंधों में अल्पाविध निवेश के लिए किया जा सकता है। ऐसा स्टॉक में पुनिर्नवेश होने तक किया जा सकता है। जब नकद भावी अवस्थाओं में निवेश करने के लिए पर्याप्त सीमा तक पहुंच जाता है तब उसे बंद किया जा सकता है और निधि को भौतिक संपतियों मे निवेश किया जा सकता है।
 

2. नियत आय प्रतिभूतियों में अस्थायी निवेश कर
अल्पकालीन मुद्रा बाज़ार दस्तावेज़ों को नियत आय या कॉल मुद्रा बाज़ार में रख कर नकद का निवेश किया जा सकता है। इस प्रकार िलिक्विडिट प्रयोजन के लिए रोके गये धन का इस्तेमाल प्रतिफल उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है। ताकि ट्रैकिंग एरर पर प्रयोग की जा रही निधि का जोखिम कम हो पाए।

सूचकांक निधियों के प्रदर्शन को नापना
प्रतिफल उत्पन्न करने के क्रम में पूर्वपरिभािषत सूचकांक के लिए सूचकांक निधि को बनाया गया है। सूचकांक निधि के प्रतिफल की, उसके छ।ट की तरह नापे गए, कुल प्रतिफल सूचकांक से तुलना की जानी चाहिए ;जैसा पृष्ठ 25 पर बताया गया है। द्ध कारण, सूचकांक निधि अपने लाभांशों को पुनिर्नवेश करती है और कुल प्रतिफल सूचकांक लाभांशों के साथ सूचकांक निवेश सूची पर प्रतिफल दर्शाता है।

अन्य संबंधित अवधारणाएं/सिद्धांत

कृत्रिम सूचकांक निधि : 
सूचकांक निधि स्टॉक सूचकांक भावी सौदों की तरह भौतिक संपति और उत्पन्न दस्तावेज़ों दोनों पर उत्पन्न किए जा सकते हैं। अमौलिक दस्तावेज़ों पर आधारित निधि,कृत्रिम सूचकांक निधि कहलाती है और वे सूचकांक की तरह िबना किसी मूलभूत/अंतिर्नहीत प्रतिभूतियों को संचालित किए समान प्रतिफल देने की कोशिश करते हैं। कृत्रिम सूचकांक निधि सामान्य सूचकांक निधियों के सूचकांक भावी बाज़ार की तरलता के मुकाबले लेनदेन की कम कीमत प्रदान करते हैं। किसी सामूहिक प्रक्रिया या सूचकांक घटकों में किसी बदलाव के लिए उन्हें किसी भी तरह के निपटारे की ज़रूरत नहीं होती है। इसके नकारात्मक पक्ष में, वे कंपनी द्वारा बंाटे गए नकद लाभांशों और स्टॉक लैंडिंग के फ़ायदों से वंचित रहते हैं।
 
दूसरे सूचकांक भावी अनुबंध समाप्त हो जाते हैं और सूचकांक निधि को अगले उपलब्ध अनुबंध में इस स्थिति को पुर्नस्थापित करना पड़ता है। इस प्रक्रिया को रॉलओवर कहा जाता है। बडी़ सूचकांक निधि को रॉलओवर के समय लेनदेन की काफ़ी कीमत खोनी पड़ेगी। और यदि बाज़ार पर्याप्त रूप से तरल नहीं हैं तो वह इतने बड़े लेनदेन को नहीं उठा पाएगा।

स्टॉक लैंडिंग :  
स्टॉक लैंडिंग एक प्रक्रिया/व्यवस्था है जहां निवेशक ज़रूरत होने पर एक विशेष प्रतिभूति को उसके धारक से एक शुल्क के बदले में ऋण पर लेता है। सूचकांक निधि स्टॉक लैंडिंग कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त होते हैं क्योंकि वे लंबी अवधि संपत्ति को धारण किए होते हैं।

झुकाव निधि :  
इसे सूचकांक जैसी एक निवेश सूची से बनाया जाता है। लेकिन एक निश्चित कारक के प्रति झुकाव के साथ। इस तरह की निधि का लक्ष्य निरंतर आधार पर सूचकांक का बेहतर प्रदर्शन कराना है। यह कई कारकों जैसे उच्च प्रतिफल स्टॉक्स, कार्यक्षेत्र विशेष स्टॉक्स, उच्च सहसंबंध वाले स्टॉक्स की तरफ़ झुक सकता है। कुछ बाहरी/विदेशी निधि झुकाव चक्रीय पद्धित प्रदान करते हैं। और ये विभिन्न कारक निधि की निवेश धारणा/सिद्धांत को बाज़ार की अलग–अलग समय की स्थिति पर निर्भर रहकर संचालित कर सकते हैं।

बाहरी/विदेश बाज़ार
1970 के अंत में सूचकांक निधि संयुक्त राज्य में भली–भांति स्थापित हो चुकी थी। ऐसा मानना है कि अमेरिका में घरेलू इक्विटीज़ का 25 प्रतिशत से भी ज़्यादा हिस्सा निष्क्रिय निवेश के रूप में संस्थागत निवेशकों के पास है। पेंशन निधि उद्योग के विस्तार के परिणामस्वरूप बाहरी/विदेशी सूचकांाक निधि का विकास हुआ। सूचकांक निधि में संस्थागत निवेशकों द्वारा निवेश ;रिटायरमैंट प्लान्स और एंडोमैंट निधि द्ध1980 के 10 अरब डॉलर से 2008 के अंत में 1.3 ट्रिलयन से भी ज्यादा तक बढ़ चुका है। पूरे विश्व में वेनगार्ड समूह सूचकांक निधि में सबसे आगे है। गेलैक्सी, फिडेलिटि, मेरिल लिंच सूचीकण प्रदान करने वाले दूसरे म्यूचुअल फंड्स हैं।

सूचकांक निधि में ब्याज का फैलाव अमेरिकी बाज़ारों से लेकर ब्रिटेन तक है। एक बार फिर, ये पेंशन निधि ही थी, जिसने संस्थागत संपतियों के एक बड़े महत्वपूर्ण भाग का प्रतिनिधित्व किया था। ये भाग ब्रिटेन के बाज़ार में सूचकांक में शामिल किए गए थे। इसकी लहर महाद्वीपीय यूरोप, मध्य एशिया तक जारी रही। हालांकि, जापान को छोड़कर एशिया में सूचकांकन अभी भी अपनी शुरूआत में ही है।

भारत में संभावना

पेंशन निधि
सूचकांक निधि के उपयोग को अमेरिकी बाज़ारों के पेंशन निधि से शुरूआती मदद/प्रोत्साहन मिला। अमेरिकी और ब्रिटिश बाज़ारों में पेंशन निधि के निवेश के कारण सूचकांक निधि का विकास बड़े स्तर पर रहा है। भारत के संदर्भ में, इस बात की संभावना है कि सरकार आने वाले सालों में पेंशन निधि क्षेत्र को इक्विटी बाज़ारों में निवेश करने की इजाज़त देकर उसे उदार बना दे। हालांकि, इनमें से अधिकतर निवेशों की इक्विटी बाज़ार में सूचकांक निधि मार्ग के ज़िरए चढ़ने की संभावना बनी रहती है। इसके आगे, बैंकों को उनकी संपति के एक हिस्से का इक्विटी बाज़ारों में निवेश करने की आज्ञा देकर, सूचकांक निधि इस तरह के निवेशों के लिए एक अच्छा रास्ता बन सकती है।

सूचकांक निधि के लिए सेबी के दिशा–निर्देश
सूचकांक निधि के लिए दिशा–निर्देश भारत में म्यूचुअल निधि पर लागू होने वाले दिशा–निर्देशों में से केवल एक को छोड़कर समान हैं।

सूचकांक निधि द्वारा किए गए निवेश आफ़र दस्तावेज़ में बताए गए विशेष सूचकांक में शेयरों के भार के अनुकूल होने चाहिए। क्षेत्र/उद्योग जैसी खास योजना के मामले में, निवेश की उच्च अंतिम सीमा आॅफ़र दस्तावेज़ में दिए गए प्रतिनिधि क्षेत्रीय सूचकांक/उपसूचकांक शेयरों के भार के अनुकूल या योजना के छ।ट की 10 प्रतिशत, इनमें से जो भी उच्च हो, हो सकती है।’’

सेबी (म्यूचुअल निधि विनियम), 1996 की सातवीं अनुसूची के 10वें परिच्छेद के नियम के निर्देश से 5 जनवरी, 2000 को बांटा गया

सेबी (म्यूचुअल निधि - संशोधन) विनियम, 1999 की सातवीं अनुसूची के 10वें परिच्छेद के अनुसार : कोई भी म्यूचुअल निधि योजना किसी कंपनी के इक्विटी शेयर्स या इक्विटी से संबंधित दस्तावेज़ों में अपने NAV का 10 प्रतिशत से ज्यादा निवेश नहीं करेगी।

लेकिन, 10 प्रतिशत की सीमा सूचकांक निधि या क्षेत्र या उद्योग विशेष योजना में निवेश पर लागू नहीं होगी’’ 

सूचना सौजन्य:  


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