निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि
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"निवेशक हित सर्वोपरि"


श्री सलमान खुर्शीद
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निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि (आईईपीएफ) के बारे में
अधिनियम

धारा 205 सी (निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि की स्थापना)
 

1.

केन्द्र सरकार निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि के नाम से जाने जाने वाली निधि की स्थापना करेगी (जिसे इस खण्ड में निधि के सन्दर्भ में देखा जायेगा)।
 

2. निधि में निम्नलिखित राशि जमा की जायेंगी:–
 
 
 
अ. कम्पनियों के अदत्त लाभांश खातों की राशि
ब.

किसी प्रतिभूति के आवंटन और वापसी के लिए कम्पनियों द्वारा आवेदन राशि की प्राप्त राशि

स. कम्पनियों में परिपक्व जमा राशि
द. कम्पनियों में परिपक्व ऋणपत्र
य.

वाक्य अ से द में दिये गये राशि पर अर्जित ब्याज

र.

केन्द्र सरकार,राज्य सरकारों,कम्पनियों या अन्य संस्थानों द्वारा निधि के कार्यों के लिए दिया गया अनुदान एवं दान राशि

ल.

निधि से निर्मित निवेशों से प्राप्त ब्याज एवं अन्य आय 

 

बशर्ते कि ऐसी राशि वाक्य अ से द में न दी गई हों और ये निधि का ही भाग हों। ऐसी राशि पर किसी का दावा न होने की दशा में ये भुगतान देय होने की तिथि से 7 साल की अवधि तक के लिए अदत्त रहेंगे।
 
व्याख्या: संदेहों को मिटाने के लिए, एतत्द्वारा घोषणा की जाती है कि ऐसी व्यक्तिगत राशि जिनके लिए भुगतान देय होने की तिथियों से सात साल तक की अवधि तक कोई दावा नहीं किया गया है और वे इस अवधि के दौरान अदत्त रही हैं,के सम्बन्ध में निधि या कम्पनी के खिलाफ कोई भी दावा नहीं किया जायेगा और ऐसी राशियों के लिए किये गये किसी भी दावे का भुगतान नहीं किया जायेगा।

 

3.

निधि का उपयोग निर्धारित नियमों का पालन करते हुए निवेशकों में जागरूकता का प्रसार और निवेशक हितों की सुरक्षा के लिए किया जायेगा। 

4.

केन्द्र सरकार राजकीय राजपत्र जारी करके एक प्राधिकरण या समिति का गठन करेगी,जिसमें केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त सदस्य होंगे और समिति निधि का प्रबन्धन एवं संचालन करेगी और भारतीय महालेखापरीक्षक की सलाह से निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार निधि से सम्बन्धित जरूरी खाते और लेखे रखेगी।

5.

उप–धारा (4) के तहत नियुक्त प्राधिकरण या समिति निधि के मकसद को पूरा करने के क्रम में निधि से बाहर भी कोष का प्रयोग करने में सक्षम होगी। 


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